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सुंदरकांड EPIC HINDI RAP | जाग उठे हनुमान | Episode 01 @djinkarnate



Track Details & Info

Song Title: सुंदरकांड EPIC HINDI RAP | जाग उठे हनुमान | Episode 01 @djinkarnate
Artist / Channel: AbbyViral
Audio Duration: 06:00 Min
File Size: 8.24 MB
Audio Bitrate: 192 kbps High Quality
Release Date: January 17, 2025
Total Streams: 434,753 views

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Official Description & Notes

https://open.spotify.com/artist/4gkEKQxzYalurjLlKyEXha
Please support my work on Spotify:

क्या आप तैयार हैं हनुमान जी की अद्भुत गाथा को एक नए अंदाज़ में सुनने के लिए? 🙏❤️
Abby Viral लेकर आए हैं "सुंदरकांड रैप", जिसमें हनुमान जी की छुपी हुई शक्ति और उनके तांडव रूप को एक दमदार हिंदी रैप के ज़रिए पेश किया गया है।
इस रैप में आपको मिलेगा:

एक ऐसा अनोखा अनुभव जो भक्तिभाव और आधुनिक संगीत को जोड़ता है।
हनुमान चालीसा और हनुमान bhajan के प्रेमियों के लिए यह रैप एक नई श्रद्धांजलि है।

🔥 तो आइए, सुनें और जुड़ें इस भक्ति के रैप संग्राम में!
🙏 जय श्री राम! जय बजरंगबली! 🙏

Mix n Master: @djinkarnate

Lyrics:

जामवन्त कहे रामभक्त हनुमान,
वक्त है आप सत्य का ज्ञात,
तथ्य करो याद आज,
था रहस्य यह राज़,
सुनो...

तुम तो संस्कृत के अधिकारी
प्रभु-रहस्य के ज्ञाता हो,
सर्व शास्त्र hai gyaat साथ ही
मन्‍त्रों के निर्माता हो

वेद्‌-विहित व्याकरण-शुद्ध
रस--भरी तुम्हारी वाणी hai
ह्रस्व--दीर्घ-झंकृत उच्चारण
कथन-शक्ति कल्याणी hai

गरुड़ू-पंख में जो बल है
Vahi बल है पुष्ट भुजायों में
पवन देव के prabal वेग है
कठिन तुम्हारे पाँवों में

यह समुद्र क्या bachpan में ही
सूर्य-लोक se आये हो
इन्द्र-वज्र सह लिया मगर
अपनी हनु ko खो आये हो

वामन saman, त्रिलोक नाप
सकते हो यदि तुम चाहो तो
धरा उठाकर उड़ सकते हो
अपनी शक्ति जगायो तो

उठो गरजते सिन्धु लाँघ कर
हम सब का उद्धार करो
जगदम्बा का पता लगाकर
रघुकुल का उपकार करो

स्तूयमान हनुमान गरज कर
उठे रोम भरभरा उठे
कपि-गर्जन ki भीम नाद
Jungle pahaad हरहरा उठे

किया गात विस्तार सिंह सम
बारं बार जँभाई ली
तैर गया लोहू आँखों में
गरज-गरज अँगड़ाई ली


एक बार हुंकार किया फिर
वातावरण कराह उठा
वीर वानरों का समूह मिल
वाह-वाह कर वाह उठा

lapak उछल kar parvat par
पर aakar धमके बजरंग बली
अचल हिला तो फूल bhi jhad kar
बिखर गये गिरि गली-गली

अद्रि कम्प से टूट टूट कर
बड़े बड़े पाषाण गिरे
Fase bechare वन्‍य जीव
मानो लक्ष्मण के बाण गिरे

दंश मारने लगे विषैले
sarp गिरि--चट्टानों को
चटक चटक चट्टानें टूटीं
तो भय हुआ महानों को

पवन--तनय पर्वत pe pair
Purzor pasaare खड़े हुए
तेजस्वी तन-रूप देख कर
वानर हर्षित बड़े हुए

हनुमान किल किला गरज कर
चकित वानरों से बोले
एक एक हुंकार घोष पर
पर्वत के कण कण डोले


वीर वानरो, करो प्रतीक्षा
राम-बाण बन जाऊँगा
जगदम्बा का समाचार
आनन-फानन में लाऊँगा

कौन samandar तैरे मैं तो
aasamaan से ही जाऊँगा
Tez गाति se ban vimaan
Ud pakshiyon को दहलाऊँगा

इन्द्र-हाथ से vajra छीन कर
abhi कहो तो लाऊँ मैं
देख रहा हूँ जगदम्बा को
बोलो तो उड़ जाऊँ मैं

सब की सम्मति हो तो मैं
लंका को यहीं उठा लाऊँ
और नहीं तो आज्ञा दें
Mai jaake आग लगा आऊँ



यह कह कर गरजे, नागिन सी
पूंछ उछाली अम्बर में
भाव वेग से तन झक झोरा
उठीं तरंगें अन्तर में

लगे गरजने बार-बार, गिरि
हिला, निवासी काँप उठे
एक साथ ही मृत्यु आ गई
सबकी, सब जन भाँप उठे

तन समेट कर बड़े वेग से
उछले सबको दहलाते
हनुमान सच गरुड़ बन गये
उड़े गगन में लहराते


नील गगन में feel pavan सी
लम्बी पूँछ फहरती थी
अगल बगल से हवा निकल कर
बादल bani गरजती थी

कठिन वेग से खींच बादलों
को नभ में छितराते
बड़ी-बड़ी लहरें उठतीं
हनुमान गरजते जाते



चली देव-प्रेरित सुरसा फिर
राह रोक कर खड़ी हुई
बोली, bhukhi intaar में
यहीं युगों से अड़ी हुई

भूख लगी है तुमको खाकर
अपनी भूख बुझाऊँगी
Bade Lage swadisth mujhe tum
ठहरो भोग लगाऊँगी

हनुमान सुरसा से बोले
माँ, छण करो प्रतीक्षा तुम
राम-कार्य मैं कर आऊँ
दो zara समय की भिक्षा तुम

राम लोक-प्रिय साधु यशस्वी
नामी महिमा वानों में
साधु-कार्य में बाधक ki
निन्‍दा होती विद्वानों में

nahi मैं कुछ नहीं मानती
Bani vishaal si फैलाया maya se
Apne shareer, to do gune
Size me twice, the mahaveer…surprise!

जैसे जैसे बदन बढ़ा
वैसे वैसे कपि देह बढ़ी
हनुमान के अंग-अंग पर
एक भयंकर ज्योति चढ़ी

नरक-द्वार की तरह भयावह
जब सुरसा का बदन हुआ
एक होठ पानी में dikhta
और दूसरा गगन छुआ

तब लघु-तन बन गये पवनसुत
मन में कुछ कलबल आये
मुँह में घुसकर कर्ण रन्ध्र से
बाहर तुरत निकल आये

और प्रणाम किया सुरसा को
वह भी बहुत प्रसन्न हुई
आशीर्वाद दिया uske paschaat
syat vo dhanya हुई

पुनः चले आकाश तैरते
विद्युत्गति से कपि नाहर
विस्मित देव उड़ान देखते
निकल-निकल घर से बाहर

अभी न दूर गये थे तब तक
mili सिंहिका मतवाली
नभचारी जीवों की छाया
झपट पकड़ लेने वाली

उसने उड़ते मारुति की भी
परछाईं को पकड़ लिया
खा जाने को मुँह बाया
दोनों हाथों से जकड़ लिया


Pareshan fir हनुमान jab
एक हाथ भी बढ़ न सके
Lohe ki zanzeer में जकड़े
Akde aage badh न सके

तभी गरजती हुई सिंहिका
सागर के ऊपर उछली
देख राक्षसी का दुःसाहस
क्रुद्ध हुए बजरंगबली

मुँह में घुसकर tez nakhuno से
Beech पेट ko चीर दिया
Jaa kar ke सागर के जल में
उसका फेंक शरीर दिया

बिना रुके रघुनाथ कार्य के
लिये पुनः ऊपर उछले
नभ को अपनी ओर खींचते
पक्षिराज की तरह चले

फूलों की वर्षा की, सब
देवों ने आशीर्वाद दिया
मार सिंहिका को तुमने
हम सब के हित का कार्य किया

होगा सिद्ध अभीष्ट तुम्हारा
जाओ पथ मंगल मय हो
रावण-पालित लंका में
हुँकार तुम्हारा निर्भय हो

विघ्न ठेलते धमक गये
हनुमान लक्ष्य की छाती पर
लघु तन किया कि भेद प्रगट हो
कहीं न सुर-नर-घाती पर

लंका के रक्षक पर्वत के
एक शिखर के वृक्ष तले
सोच samajh ke kar प्रवेश
The सावधान हनुमान चले

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